गर्भनिरोधक गोली का नुकसान क्या है?HealthPlanet

Posted on Tue 7th Feb 2023 : 13:45

गर्मनिरोधक गोलियों के नुकसान

ब्लड क्लॉट का खतरा बढ़ाए
पेरेंट्स डॉट कॉम में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, बर्थ कंट्रोल या कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स के सेवन से महिलाओं में ब्लड क्लॉट होने का रिस्क तीन गुना बढ़ जाता है. यदि आपको कार्डियोवैस्कुलर डिजीज होने के जोखिम कारक जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, स्मोकिंग की आदत नहीं है, तो ब्लड क्लॉट का रिस्क काफी हद तक कम रहता है. यदि आपको ब्लड क्लॉटिंग के कोई भी लक्षण नजर आते हैं जैसे सीने में दर्द, पैरों में सूजन तो इन दवाओं का सेवन तुरंत बंद कर दें

ब्रेस्ट में दूध का निर्माण हो सकता है कम
यदि आपका पहला बच्चा है और उसे ब्रेस्टफीड कराती हैं, तो दूसरा बच्चा जल्दी ना करने के लिए बहुत ज्यादा गर्भनिरोधक गोलियों पर निर्भर (garbh nirodhak dawa ke nuksan) रहती हैं, तो इससे ब्रेस्ट मिल्क का निर्माण कम हो सकता है. इन दवाओं में एस्ट्रोजेन होता है, जो दूध बनने की प्रक्रिया को 5 प्रतिशत तक कम कर देता है.

पीरियड्स के लक्षणों में आ सकता है बदलाव
बर्थ कंट्रोल पिल्स के सेवन से आपके पीरियड्स के लक्षणों में कुछ बदलाव नजर आ सकता है. आपको सिरदर्द, स्तनों में सूजन, वाटर रिटेंशन, मूड स्विंग्स, उल्टी, मतली जैसे लक्षण दिख सकते हैं. हालांकि, ये लक्षण अधिक गंभीर नहीं होते हैं, जो पीरियड्स खत्म होने के बाद समाप्त हो जाते हैं. हां, पीरियड्स के बाद भी ये लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें.

मूड रहता है खराब
कुछ महिलाओं में कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स खाने से मूड खराब होने जैसे लक्षण नजर नहीं आते हैं, लेकिन किसी-किसी के मूड में भारी बदलाव नजर आ सकता है. वे अक्सर डिप्रेशन, स्ट्रेस, चिड़चिड़ापन महसूस करती हैं. किसी भी तरह के भावनात्मक दुष्प्रभाव (emotional side effects) नजर आने पर डॉक्टर से बात करें.

लिबिडो होता है कम
इन दवाओं से कुछ महिलाओं में लिबिडो में कमी आ सकती है. उनमें सेक्स के प्रति रूचि कम हो जाती है, क्योंकि ये दवाइयां टेस्टोस्टेरॉन के स्तर को कम कर देती हैं. हालांकि, ये गर्भनिरोधक सभी महिलाओं में टेस्टोस्टेरॉन का स्तर कम करते हैं, लेकिन कुछ में ही कामेच्छा में कमी लाते हैं.

बढ़ सकता है अवसाद
यदि आप लगातार गर्मनिरोधक गोलियां खाती हैं, तो आप अवसाद (Depression) की समस्या हो सकती है. इससे शरीर में प्रोजेस्टेरॉन, एस्ट्रोजेन नामक हार्मोन में गड़बड़ी आती है, जो डिप्रेशन, स्ट्रेस को बढ़ावा देते हैं. मूड हमेशा खराब रह सकता है, जो मानसिक सेहत के लिए सही नहीं है.

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